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29 को भद्रा के भय के बिना मनाया जाएगा करवा चौथ

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रायपुर.

सुहागिनों का प्रमुख त्यौहार करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर को रखा जाएगा. खास बात यह होगी कि इस मर्तबा भद्रा का कोई भय नहीं रहेगा. यानिकि भद्रामुक्त करवा चौथ है.

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. करवा चौथ व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद चांद को देखने के बाद ही किया जाता है. हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है.

इस साल यह पावन दिन 29 अक्टूबर को पड़ रहा है. इसी दिन सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी. करवा चौथ के दिन भगवान गणेश के साथ ही करवा माता, भगवान शिव, मां पार्वती और कार्तिकेय की पूजा की जाती है.

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 29 अक्टूबर को मध्यरात्रि 1 बजे से होगा. चतुर्थी तिथि का समापन 29 अक्टूबर को रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा.

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. वहीं करवा चौथ व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा.

चांद निकलने का समय…

करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है. बिना चांद की पूजा और दर्शन के यह व्रत पूरा नहीं माना जाता है. करवा चौथ के दिन चांद निकलने का समय रात 8 बजकर 17 मिनट रहेगा. हालांकि शहर के अनुसार चंद्रोदय का समय अलग-अलग हो सकता है.

भद्रा काल 28 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 31 मिनट से आरंभ होगा. इसका समापन 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट को होगा. ऐसे में करवा चौथ के दिन पूजा के समय भद्रा का कोई प्रभाव नहीं होगा. व्रती महिलाएं भद्रा समाप्त होने के बाद सरगी भी कर सकती हैं.

पूजा सामग्री सूची…

करवा और ढक्कन (मिट्टी या तांबा), छलनी, कांस की तीलियां, पानी का लोटा, मिठाई, दीपक, मिट्टी की पांच डेलियां, सिंदूर, अक्षत, रोली, मौल, कुमकुम, देसी घी, चावल, फूल, फल, चंदन, सुहाग का सामान (16 श्रृंगार का सामान), पका हुआ भोजन, हलवा, आठ पूरियों की अठावरी, कच्चा दूध, नारियल, पान, व्रत कथा की किताब, करवा माता की तस्वीर, ड्राई फ्रूट्स, कपूर, रूई की बाती, अगरबत्ती – धूप, हल्दी, दही, इत्यादि.

महत्वपूर्ण तथ्य :

* व्रत की तिथि : 29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)

* चतुर्थी तिथि प्रारँभ : 29 अक्टूबर 2026 को सुबह 01:06 बजे

* चतुर्थी तिथि समाप्त : 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे

* सरगी का समय : सुबह 03:30 से सुबह 05:30 बजे के बीच

* पूजन मुहूर्त : शाम 05:38 से शाम 06:56 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 17 मिनट)

* व्रत का समय (उपवास): सुबह 06:31 से रात 08:17 बजे तक

* चंद्रोदय का समय : रात 08:17 बजे (स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है)

पर्व का महत्व :

* सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह निर्जला (बिना जल और अन्न के) व्रत रखती हैं.

* इस दिन भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी, करवा माता और चंद्रमा की पूजा की जाती है.

* रात में चंद्रमा को छलनी से देखने और अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है.